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Business News: IPO बाजार में आएगी बड़ी रकम, कंपनियां जुटा सकती हैं 2 लाख करोड़ रुपये तक; SEBI चेयरमैन का बड़ा बयान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे के मुताबिक कंपनियां IPO के जरिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 60 हजार करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं।

मुंबई, 22 सितंबर 2026। भारत के प्राथमिक शेयर बाजार में आने वाले समय में कंपनियों की ओर से बड़े स्तर पर पूंजी जुटाने की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। Alam Ki Khabar को मिली जानकारी के अनुसार SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि कंपनियां IPO के माध्यम से करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती हैं। यह बयान 11वीं जे.पी. मॉर्गन इंडिया कॉन्फ्रेंस के दौरान सामने आया।

तुहिन कांत पांडे के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक IPO के जरिए करीब 60,000 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। इसमें लगभग 55 प्रतिशत राशि फ्रेश कैपिटल के रूप में कंपनियों के पास गई है। इसका मतलब है कि जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा कंपनियों के कारोबार में नई पूंजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

IPO से जुटाई जा रही पूंजी में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल के बीच अंतर महत्वपूर्ण होता है। फ्रेश इश्यू के जरिए मिलने वाली राशि कंपनी के पास आती है, जबकि ऑफर फॉर सेल में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। ऐसे में फ्रेश कैपिटल का बढ़ता हिस्सा कंपनियों के विस्तार और कारोबारी जरूरतों के लिए सीधे उपलब्ध पूंजी से जुड़ा है।

SEBI चेयरमैन ने भारत के इक्विटी बाजार के बढ़ते आकार का भी उल्लेख किया। भारत के इक्विटी बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 5 ट्रिलियन डॉलर बताया गया है। पिछले एक दशक में इक्विटी और डेट इश्यू के जरिए 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी जुटाए जाने की बात भी कही गई।

सार्वजनिक बाजार तक कंपनियों की पहुंच आसान बनाने पर जोर

SEBI की ओर से पूंजी बाजार के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। तुहिन कांत पांडे के अनुसार रेगुलेटर ऐसी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है, जिनमें कंपनियों का समय और लागत बढ़ती है, लेकिन निवेशकों की सुरक्षा में उसके अनुपात में पर्याप्त अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता।

इसका उद्देश्य कंपनियों के लिए सार्वजनिक बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाना है। इसके साथ ही निवेशकों के हितों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपायों को बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।

डिस्क्लोजर प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश

कंपनियों को IPO के दौरान कई तरह की जानकारी निवेशकों और बाजार के सामने रखनी होती है। SEBI की ओर से इस डिस्क्लोजर प्रक्रिया को भी अधिक सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

पांडे के मुताबिक सभी कंपनियों के लिए एक जैसी आवश्यकताएं लागू करने के बजाय उनके आकार और कारोबार की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए जरूरतों को तय करने पर काम किया जा रहा है। इससे कंपनियों के लिए नियामकीय अनुपालन को अधिक व्यावहारिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार का भी बढ़ा आकार

SEBI चेयरमैन ने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार की स्थिति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड की राशि वित्त वर्ष 2015-16 के करीब 20 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग 61 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कॉरपोरेट बॉन्ड के जरिए 43,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है। इससे कंपनियों के लिए शेयर बाजार के अलावा डेट मार्केट से पूंजी जुटाने का विकल्प भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

देश में बढ़ रही घरेलू निवेशकों की संख्या

भारतीय कैपिटल मार्केट में घरेलू निवेशकों की भागीदारी भी पिछले वर्षों में बढ़ी है। देश में अब करीब 14.9 करोड़ यूनिक सिक्योरिटीज-मार्केट निवेशक बताए जा रहे हैं।

म्यूचुअल फंड उद्योग के आकार में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। पिछले पांच वर्षों में म्यूचुअल फंड की एसेट्स करीब 37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी दी गई। इससे घरेलू बचत के बाजार आधारित निवेश साधनों की ओर बढ़ते रुझान का संकेत मिलता है।

विदेशी निवेशकों की भी बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका

भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है। उनके पास कस्टडी में करीब 818 बिलियन डॉलर की संपत्ति होने की जानकारी दी गई।

अगस्त में FPI लगातार दूसरे महीने भारतीय इक्विटी में नेट खरीदार रहे। प्राथमिक बाजार में आने वाले नए इश्यू भी विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

SEBI का फोकस बाजार की प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर

SEBI चेयरमैन ने आगे भी बाजार में अनावश्यक बाधाओं को कम करने और पूंजी बाजार की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया। नियामक का प्रयास ऐसी व्यवस्था तैयार करने का है, जिसमें कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो, जबकि निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े आवश्यक प्रावधान भी प्रभावी बने रहें।

डिजिटल ऑनबोर्डिंग को आसान बनाने की तैयारी

भारत से बाहर रहने वाले निवेशकों के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

इसके अलावा गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में FPI की भागीदारी बढ़ाने से जुड़े उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। इन कदमों का संबंध भारतीय पूंजी बाजार को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाने से है।

कॉरपोरेट बॉन्ड के लिए मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क पर काम

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में कारोबार और लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए SEBI मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क पर भी काम कर रहा है। इसके तहत बॉन्ड बाजार में खरीद-बिक्री की गतिविधियों को बढ़ाने, बाजार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और रेपो बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

रेगुलेटेड ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से बॉन्ड की पहुंच और वितरण को बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे निवेशकों और कंपनियों के बीच बॉन्ड बाजार की पहुंच को और व्यापक बनाने की कोशिश की जा सकती है।

IPO और डेट मार्केट के विस्तार के बीच भारत का कैपिटल मार्केट लगातार बदल रहा है। कंपनियों के लिए इक्विटी और बॉन्ड दोनों माध्यमों से पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में IPO के जरिए संभावित 2 लाख करोड़ रुपये तक की फंडिंग का अनुमान इसी बढ़ती बाजार गतिविधि की ओर संकेत करता है। हालांकि वास्तविक राशि कंपनियों के इश्यू, बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की भागीदारी पर निर्भर करेगी।

Editorial: IPO बाजार का बढ़ता दायरा कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के नए रास्ते खोल रहा है। लेकिन बड़े इश्यू के साथ निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, वैल्यूएशन और IPO से मिलने वाली राशि के इस्तेमाल को समझना भी जरूरी है। बाजार का विस्तार तभी व्यापक रूप से उपयोगी माना जाएगा, जब पूंजी जुटाने की सुविधा के साथ पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा के मानक भी मजबूत बने रहें।

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